श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.6.81 
কিবা প্রভু, কিবা গণ, কিবা অলঙ্কার
জ্যোতির্-ময বৈ কিছু নাহি দেখে আর
किबा प्रभु, किबा गण, किबा अलङ्कार
ज्योतिर्-मय बै किछु नाहि देखे आर
 
 
अनुवाद
अद्वैत ने भगवान, उनके पार्षदों और उनके आभूषणों को तेज से परिपूर्ण देखा।
 
Advaita saw the Lord, His associates and His ornaments full of radiance.
तात्पर्य
उन्होंने श्री महाप्रभु, उनके भक्तों और भगवान द्वारा पहने गए आभूषणों को पूर्ण रूप से तेज से भरा हुआ देखा; वह कुछ और देख ही नहीं पा रहे थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)