श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  2.6.78 
শ্রীবত্স, কৌস্তুভ-মহামণি শোভে বক্ষে
মকর কুণ্ডল বৈজযন্তী মালা দেখে
श्रीवत्स, कौस्तुभ-महामणि शोभे वक्षे
मकर कुण्डल वैजयन्ती माला देखे
 
 
अनुवाद
उनका चौड़ा वक्षस्थल श्रीवत्स और कौस्तुभ मणि से सुशोभित था। उन्होंने शार्क के आकार के कुण्डल और वैजयंती माला धारण की थी।
 
His broad chest was adorned with the Srivatsa and Kaustubha gems. He wore shark-shaped earrings and the Vaijayanti garland.
तात्पर्य
श्री गौरासुंदर का सुंदर हृदय श्रीवत्स तथा कौस्तुभ मणि के चिन्ह से सुशोभित था, कानों में मकर-कुंडल सुशोभित थे और गले में लंबी वैजयंती की माला सुशोभित थी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)