श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  2.6.76 
প্রসন্ন-বদন কোটি-চন্দ্রের ঠাকুর
অদ্বৈতের প্রতি যেন সদয প্রচুর
प्रसन्न-वदन कोटि-चन्द्रेर ठाकुर
अद्वैतेर प्रति येन सदय प्रचुर
 
 
अनुवाद
उनका मनोहर मुख करोड़ों चन्द्रमाओं की सुन्दरता को भी मात करता था। वे सदैव अद्वैत आचार्य पर कृपा करते थे।
 
His beautiful face surpassed the beauty of millions of moons. He always showered his blessings on Advaita Acharya.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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