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श्लोक 2.6.76  |
প্রসন্ন-বদন কোটি-চন্দ্রের ঠাকুর
অদ্বৈতের প্রতি যেন সদয প্রচুর |
प्रसन्न-वदन कोटि-चन्द्रेर ठाकुर
अद्वैतेर प्रति येन सदय प्रचुर |
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| अनुवाद |
| उनका मनोहर मुख करोड़ों चन्द्रमाओं की सुन्दरता को भी मात करता था। वे सदैव अद्वैत आचार्य पर कृपा करते थे। |
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| His beautiful face surpassed the beauty of millions of moons. He always showered his blessings on Advaita Acharya. |
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