श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  2.6.75 
জিনিযা কন্দর্প-কোটি লাবণ্য সুন্দর
জ্যোতির্-ময কনক-সুন্দর কলেবর
जिनिया कन्दर्प-कोटि लावण्य सुन्दर
ज्योतिर्-मय कनक-सुन्दर कलेवर
 
 
अनुवाद
भगवान की मनमोहक सुन्दरता करोड़ों कामदेवों को भी मात कर देती थी और उनका तेजस्वी शरीर पिघले हुए सोने के समान चमकता था।
 
The Lord's captivating beauty surpassed even millions of Cupids and his radiant body shone like molten gold.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)