श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  2.6.72 
শুনিযা আনন্দে ভাসে অদ্বৈত-আচার্য
আইলা প্রভুর স্থানে সিদ্ধ হৈল কার্য
शुनिया आनन्दे भासे अद्वैत-आचार्य
आइला प्रभुर स्थाने सिद्ध हैल कार्य
 
 
अनुवाद
उनकी बात सुनकर अद्वैत आचार्य आनंद की लहरों में तैरने लगे। अपना उद्देश्य पूरा करके वे तुरन्त भगवान के पास चले गए।
 
Hearing this, Advaita Acharya was overcome with joy. Having accomplished his mission, he immediately departed to the Lord.
तात्पर्य
अद्वैत का उद्देश्य लोगों के बीच महाप्रभु की सर्वोच्चता और सर्वज्ञता प्रकट करना था। इसी कारण उन्होंने नंदन आचार्य के घर में अपने आप को छिपाया और छलीपूर्ण तरीके से रामई को आदेश दिया कि वह महाप्रभु को उनके इरादे की कोई जानकारी न दें। अब जबकि श्री महाप्रभु ने अद्वैत के बारे में इन तथ्यों का व्यक्तिगत रूप से खुलासा किया है और इस तरह अपनी सर्वोच्चता साबित की है, अद्वैत का उद्देश्य पूरा हो गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)