श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  2.6.70 
আন গিযাশীঘ্র তুমি হেথাই তাহানে
প্রসন্ন শ্রী-মুখে আমি বলিল আপনে”
आन गियाशीघ्र तुमि हेथाइ ताहाने
प्रसन्न श्री-मुखे आमि बलिल आपने”
 
 
अनुवाद
“जल्दी जाओ और उसे यहाँ ले आओ। मैं ख़ुशी से अपने मुँह से यह कह रहा हूँ।”
 
"Go quickly and bring him here. I'm glad to say it with my own mouth."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)