श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.6.66 
কেহো পডে স্তুতি, কেহো কোন সেবা করে
হেনৈ সমযে আসি’ রামাই গোচরে
केहो पडे स्तुति, केहो कोन सेवा करे
हेनै समये आसि’ रामाइ गोचरे
 
 
अनुवाद
कुछ लोग प्रार्थना कर रहे थे, कुछ लोग विविध प्रकार की सेवा कर रहे थे। उसी समय रामाई वहाँ आ पहुँचीं।
 
Some were praying, others were performing various kinds of service. Just then, Ramai arrived.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)