श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.6.65 
গদাধর বুঝি’ দেয কর্পূর তাম্বূল
সর্ব-জনে করে সেবা যেন অনুকূল
गदाधर बुझि’ देय कर्पूर ताम्बूल
सर्व-जने करे सेवा येन अनुकूल
 
 
अनुवाद
स्थिति को समझते हुए, गदाधर ने कपूर और सुपारी चढ़ाई। सभी उपस्थित लोगों ने अपनी-अपनी अनुकूलता के अनुसार भगवान की सेवा की।
 
Understanding the situation, Gadadhara offered camphor and betel nuts. All those present served the Lord according to their respective conveniences.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)