श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.6.63 
’নাডা আইসে, নাডা আইসে’—বলে বারে বারে
“নাডা চাহে মোর ঠাকুরাল দেখিবারে”
’नाडा आइसे, नाडा आइसे’—बले बारे बारे
“नाडा चाहे मोर ठाकुराल देखिबारे”
 
 
अनुवाद
भगवान ने बार-बार घोषणा की, "नादा आ रहे हैं। नादा आ रहे हैं। नादा मेरा ऐश्वर्य देखना चाहते हैं।"
 
The Lord repeatedly announced, "Nada is coming. Nada is coming. Nada wants to see my opulence."
तात्पर्य
अद्वैत प्रभु ने श्रीवास के छोटे भाई रामई से कहा, "तुमको महाप्रभु से कहना चाहिए कि अद्वैत नहीं आए। मैं देखना चाहता हूं कि उनकी क्या प्रतिक्रिया होती है। मैं नंदन आचार्य के घर में छिप जाऊंगा, और तुम जाकर महाप्रभु को बताना जो मैंने तुमसे कहा है।" परमात्मा, श्री गौरांग, इस गोपनीय बात को जानते थे, इसलिए वे श्रीवास के घर गए। वहां वे श्रीवास के कुलदेव नारायण के सिंहासन पर बैठे, और बार-बार घोषित किया, "नाड़ा आ रहा है। नाड़ा आ रहा है।" भगवान ने आगे कहा, "नाड़ा (अद्वैत आचार्य) मेरी सर्वोच्चता का परीक्षण करना चाहता है। उन्हें संदेह है कि क्या मैं उनके इरादे को समझ सकता हूं, या शायद उन्होंने दुनिया के सामने मुझे प्रकट करने के लिए यह चाल चली है।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)