श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.6.62 
হুঙ্কার করিযা প্রভু ত্রিদশের রায
উঠিযা বসিলা প্রভু বিষ্ণুর খট্টায
हुङ्कार करिया प्रभु त्रिदशेर राय
उठिया वसिला प्रभु विष्णुर खट्टाय
 
 
अनुवाद
तब भगवान त्रिदश राय ने जोर से गर्जना की और भगवान विष्णु के सिंहासन पर बैठ गए।
 
Then Lord Tridash Rai roared loudly and sat on the throne of Lord Vishnu.
तात्पर्य
त्रिदशेर राया वाक्यांश का अर्थ है (दस के तीन गुना से तीन अधिक, या तैंतीस, जिसमें बारह आदीत्य, ग्यारह रुद्र, आठ वसु और दो अश्वनी-कुमार शामिल हैं - ये तैंतीस प्रमुख देवता हैं और यहाँ उल्लिखित तैंतीस हैं; राया, राया, या राव का अर्थ राजा या "राजा") सर्वोच्च नियंत्रक, पूजा का पात्र और तीन सौ तीस मिलियन देवताओं का स्वामी होता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)