श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  2.6.61 
আবেশিত চিত্ত প্রভুর সবাই বুঝিযাস
শঙ্কে আছেন সবে নীরব হৈযা
आवेशित चित्त प्रभुर सबाइ बुझियास
शङ्के आछेन सबे नीरब हैया
 
 
अनुवाद
सब समझ गए कि भगवान् परमानंद में मग्न हैं। सब चिंतित होकर चुपचाप खड़े हो गए।
 
Everyone understood that the Lord was immersed in ecstasy. Everyone stood in silence, worried.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)