श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.6.58 
সবার হৃদযে বৈসে প্রভু বিশ্বম্ভর
অদ্বৈত-সঙ্কল্প চিত্তে হৈল গোচর
सबार हृदये वैसे प्रभु विश्वम्भर
अद्वैत-सङ्कल्प चित्ते हैल गोचर
 
 
अनुवाद
भगवान विश्वम्भर, जो सबके हृदय में निवास करते हैं, अद्वैत के संकल्प को समझ गए।
 
Lord Vishvambhara, who resides in everyone's heart, understood the resolve of Advaita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)