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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन
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श्लोक 55
श्लोक
2.6.55
সপত্নীকে চলিলা অদ্বৈত-মহাপ্রভু
রামাযে নিষেধে, ইহা না কহিবা কভু
सपत्नीके चलिला अद्वैत-महाप्रभु
रामाये निषेधे, इहा ना कहिबा कभु
अनुवाद
तब भगवान के अवतार अद्वैत प्रभु अपनी पत्नी के साथ चले गए। उन्होंने रमाई पंडित को अपने आगमन की सूचना देने से मना किया।
Then Advaita Prabhu, an incarnation of God, left with his wife. He forbade Ramai Pandit from informing him of his arrival.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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