श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.6.53 
পতি-ব্রতা সেই চৈতন্যের তত্ত্ব জানে
গন্ধ, মাল্য, ধূপ, বস্ত্র অশেষ বিধানে
पति-व्रता सेइ चैतन्येर तत्त्व जाने
गन्ध, माल्य, धूप, वस्त्र अशेष विधाने
 
 
अनुवाद
अद्वैत की पतिव्रता पत्नी भगवान चैतन्य के बारे में सच्चाई जानती थी। उसने चंदन का लेप, फूलों की माला, धूपबत्ती और कपड़ा इकट्ठा किया।
 
Advaita's devoted wife knew the truth about Lord Chaitanya. She gathered sandalwood paste, garlands of flowers, incense sticks, and cloth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)