श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.6.51 
হৈলা অদ্বৈত তুষ্ট রামের বচনে
শুভ-যাত্রা-উদ্যোগ করিলা তত-ক্ষণে
हैला अद्वैत तुष्ट रामेर वचने
शुभ-यात्रा-उद्योग करिला तत-क्षणे
 
 
अनुवाद
रमाई की बात सुनकर अद्वैत प्रभु प्रसन्न हुए और फिर उन्होंने शुभ यात्रा की व्यवस्था शुरू कर दी।
 
Advaita Prabhu was pleased after listening to Ramai and then he started making arrangements for the auspicious journey.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)