श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.6.50 
যে তোমার ইচ্ছা প্রভু, সেই সে তাঙ্হার
তোমার নিমিত্ত প্রভু এই অবতার”
ये तोमार इच्छा प्रभु, सेइ से ताङ्हार
तोमार निमित्त प्रभु एइ अवतार”
 
 
अनुवाद
"जो कुछ तुम चाहते हो, वही उसकी भी इच्छा है। वास्तव में, प्रभु ने तुम्हारे कारण ही अवतार लिया है।"
 
"Whatever you desire, that is also His desire. In fact, the Lord has incarnated for your sake."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)