श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.6.5 
জয রূপ-সনাতন-প্রিয মহাশয
জয জগদীশ-গোপীনাথের হৃদয
जय रूप-सनातन-प्रिय महाशय
जय जगदीश-गोपीनाथेर हृदय
 
 
अनुवाद
रूप और सनातन के प्रिय प्रभु की जय हो! उन प्रभु की जय हो, जो जगदीश और गोपीनाथ के हृदय और आत्मा हैं!
 
Glory to the Lord, the beloved of form and eternity! Glory to the Lord who is the heart and soul of Jagadish and Gopinath!
तात्पर्य
गोपीनाथ, सर्वभौम का बहनोई हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)