श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 47-48
 
 
श्लोक  2.6.47-48 
আপন ঐশ্বর্য যদি মোহারে দেখায
শ্রী-চরণ তুলি’ দেই মোহার মাথায
তবে সে জানিমু মোর হয প্রাণ-নাথ
সত্য সত্য এই মুঞি কহিলুঙ্ তোমাত”
आपन ऐश्वर्य यदि मोहारे देखाय
श्री-चरण तुलि’ देइ मोहार माथाय
तबे से जानिमु मोर हय प्राण-नाथ
सत्य सत्य एइ मुञि कहिलुङ् तोमात”
 
 
अनुवाद
"यदि वे मुझे अपना ऐश्वर्य दिखाएँ और अपने चरणकमल मेरे सिर पर रखें, तो मैं उन्हें अपने जीवन का स्वामी मान लूँगा। मैं शपथपूर्वक कहता हूँ कि यह सत्य है।"
 
"If He shows me His opulence and places His lotus feet on my head, I will accept Him as the Lord of my life. I swear that this is true."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)