श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.6.40 
অদ্বৈত গৃহিণী পতি-ব্রতা জগন্-মাতা
প্রভুর প্রকাশ শুনি’ কান্দে আনন্দিতা
अद्वैत गृहिणी पति-व्रता जगन्-माता
प्रभुर प्रकाश शुनि’ कान्दे आनन्दिता
 
 
अनुवाद
भगवान के प्रकट होने के बारे में सुनकर, अद्वैत की पतिव्रता पत्नी, जो कि जगत की माता है, खुशी से रो पड़ी।
 
Hearing about the appearance of the Lord, Advaita's devoted wife, who is the mother of the universe, wept with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)