श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.6.37 
কান্দিযা হৈলা মূর্ছা আনন্দ-সহিত
দেখিযা সকল-গণ হৈলা বিস্মিত
कान्दिया हैला मूर्छा आनन्द-सहित
देखिया सकल-गण हैला विस्मित
 
 
अनुवाद
रोते-रोते वे अचेत होकर धरती पर गिर पड़े। यह देखकर वहाँ उपस्थित सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए।
 
Weeping profusely, he fell unconscious to the ground, astonishing everyone present.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)