श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.6.35 
তুমি সে জানহ তাঙ্রে, মুঞি কি কহিমু
ভাগ্য থাকে মোর, তবে একত্র দেখিমু”
तुमि से जानह ताङ्रे, मुञि कि कहिमु
भाग्य थाके मोर, तबे एकत्र देखिमु”
 
 
अनुवाद
"आप उसे बहुत अच्छी तरह जानते हैं। मैं आपको क्या बताऊँ? अगर मेरी किस्मत अच्छी रही, तो मैं आप सभी से मिलूँगा।"
 
"You know him very well. What can I tell you? If I'm lucky, I'll meet all of you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)