श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.6.34 
নিত্যানন্দ-স্বরূপের হৈল আগমন
প্রভুর দ্বিতীয দেহ, তোমার জীবন
नित्यानन्द-स्वरूपेर हैल आगमन
प्रभुर द्वितीय देह, तोमार जीवन
 
 
अनुवाद
"नित्यानंद स्वरूप आ गए हैं। वे भगवान के दूसरे शरीर और आपके प्राण और आत्मा हैं।"
 
"Nityananda Swarupa has come. He is the second body of the Lord and your life and soul."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)