श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.6.33 
ষড্-অঙ্গ-পূজার বিধি যোগ্য সজ্জ লঞা
প্রভুর আজ্ঞায চল সস্ত্রীক হৈযা
षड्-अङ्ग-पूजार विधि योग्य सज्ज लञा
प्रभुर आज्ञाय चल सस्त्रीक हैया
 
 
अनुवाद
"उनकी पूजा के लिए उपयुक्त छह सामग्रियाँ ले लो। प्रभु ने तुम्हें अपनी पत्नी के साथ आने का आदेश दिया है।
 
"Take six items suitable for his worship. The Lord has ordered you to come with your wife.
तात्पर्य
आराध्य उपासना के मार्ग यानि अर्चन-मार्ग में पूजा की छः सामग्रियाँ हैं - जल, आसन, वस्त्र, दीप, अन्न तथा तांबूल। मंगल की भावना को जगाने वाली छः वस्तुएँ हैं - गोबर, गोमूत्र, दही, दूध, घी तथा गोरोचन। भजन-मार्ग की छः सामग्रियाँ हैं - प्रणाम करना, प्रार्थना करना, समस्त कर्मों का फल अर्पण करना, सेवा करना, प्रभु के चरणों का स्मरण करना तथा प्रभु के चरित्रों का श्रवण करना।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)