श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  2.6.30-31 
“যাঙ্র লগি’ করিযাছ বিস্তর ক্রন্দন
যাঙ্র লাগি’ করিলা বিস্তর আরাধন
যাঙ্র লাগি’ করিলা বিস্তর উপবাস
সে-প্রভু তোমার আসি’ হৈলা প্রকাশ
“याङ्र लगि’ करियाछ विस्तर क्रन्दन
याङ्र लागि’ करिला विस्तर आराधन
याङ्र लागि’ करिला विस्तर उपवास
से-प्रभु तोमार आसि’ हैला प्रकाश
 
 
अनुवाद
“जिस प्रभु की तुमने इतने समय तक आराधना की, जिस प्रभु के लिए तुमने प्रार्थना की, जिस प्रभु के लिए तुमने उपवास किया - वह प्रभु अब प्रकट हुआ है।
 
“The Lord you have worshipped for so long, the Lord you have prayed for, the Lord you have fasted for—that Lord has now appeared.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)