श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.6.3 
জয জয জগত্-মঙ্গল বিশ্বম্ভর
জয জয যত গৌরচন্দ্রের কিঙ্কর
जय जय जगत्-मङ्गल विश्वम्भर
जय जय यत गौरचन्द्रेर किङ्कर
 
 
अनुवाद
सर्व मंगलमय विश्वम्भर की जय हो! गौरचन्द्र के सेवकों की जय हो!
 
Victory to the all-auspicious Visvambhara! Victory to the servants of Gaurachandra!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)