श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.6.27 
এই-মত অদ্বৈতের চরিত্র অগাধ
সুকৃতির ভাল, দুষ্কৃতির কার্য-বাধ
एइ-मत अद्वैतेर चरित्र अगाध
सुकृतिर भाल, दुष्कृतिर कार्य-वाध
 
 
अनुवाद
अद्वैत के ये अथाह गुण हैं। ये भक्तों के लिए शुभ हैं और दुष्टों के लिए बाधक।
 
These are the immense qualities of non-duality. They are auspicious for the devotees and a hindrance to the wicked.
तात्पर्य
साधारण लोग अद्वैत प्रभु के गोपनीय गुणों को समझ नहीं सकते हैं। जो भाग्यशाली होते हैं वे भगवान के उद्देश्य को समझकर लाभांवित होते हैं, जबकि जो दुर्भाग्यशाली और पापपूर्ण कामों में लिप्त हैं, वे उन्हें बिना समझे विरोध करने का प्रयास करके अशुभता को आमंत्रित करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)