श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.6.25 
মোর ভক্তি, বৈরাগ্য, অধ্যাত্ম-জ্ঞান মোর
সকল জানযে শ্রীনিবাস ভাই তোর”
मोर भक्ति, वैराग्य, अध्यात्म-ज्ञान मोर
सकल जानये श्रीनिवास भाइ तोर”
 
 
अनुवाद
“तुम्हारा भाई श्रीनिवास मेरी भक्ति, त्याग और आध्यात्मिक ज्ञान के बारे में सब कुछ जानता है।”
 
“Your brother Srinivasa knows everything about my devotion, renunciation and spiritual knowledge.”
तात्पर्य
श्रीमद् अद्वैत आचार्य ने रमाई से कहा, “हे रमाई, तुम्हारे ज्येष्ठ भ्राता, श्रीवास, सेवा-तत्वज्ञान में मेरी कुशलता को जानते हैं।”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)