श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.6.18 
আচার্যেরে নমস্করি’ রামাই পণ্ডিত
কহিতে না পারে কথা আনন্দে পূর্ণিত
आचार्येरे नमस्करि’ रामाइ पण्डित
कहिते ना पारे कथा आनन्दे पूर्णित
 
 
अनुवाद
रामाई पंडित ने अद्वैत आचार्य को प्रणाम किया, लेकिन वे इतने आनंद में थे कि बोल नहीं पाए।
 
Ramai Pandita bowed to Advaita Acharya, but he was so ecstatic that he could not speak.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)