अद्वैत गोसांई और उनकी पत्नी प्रसन्न हो गये और भगवान के आदेश पर वे वहीं रहने लगे।
Advaita Goswami and his wife were delighted and started living there as per the orders of the Lord.
तात्पर्य
श्री नित्यानंद के विचारों और प्रभु श्री चैतन्यदेव के प्रति उनकी भक्ति का भाव समझ कर श्री अद्वैत प्रभु और उनकी पतिव्रता सती बहुत प्रसन्न हुए और श्री चैतन्यदेव की आज्ञा लेकर वे वहाँ कुछ काल तक रहे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥