সর্ব-বৈষ্ণবের পাযে মোর নমস্কার
ইথে অপরাধ কিছু নহুক আমার
सर्व-वैष्णवेर पाये मोर नमस्कार
इथे अपराध किछु नहुक आमार
अनुवाद
मैं समस्त वैष्णवों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूँ, जिससे वे मेरे अपराधों पर विचार न करें।
I offer my respectful obeisances to all Vaishnavas, so that they may not dwell on my crimes.
तात्पर्य
श्री वृन्दाबन दास ठाकुर महाराज समस्त वैष्णवों के चरणों में गिरकर उनसे अपने अपराधों को क्षमा करने की प्रार्थना करते हैं। जिनके विष्णु के प्रति भक्तिभाव जागृत हो जाते हैं, वे भगवान की और उनके भक्तों की सेवा में निरन्तर लगे रहते हैं। जो अज्ञानी अपराध करके उनकी भक्ति में बाधा डालता है, उसका जीवन नष्ट हो जाता है। यह बात लेखक के आचरण-चरित्र द्वारा स्पष्ट हो जाती है। परन्तु यदि नास्तिक और विष्णु की भक्ति से वंचित हैं, ऐसे व्यक्ति वैष्णव या गुरू बनकर अपनी प्रतिष्ठा स्थापित करना चाहें और वृन्दाबन दास ठाकुर द्वारा संचालित वैष्णव समाज का आदर प्राप्त करना चाहें तो वे भक्तों से द्वेष करने लगते हैं और सदा के लिए नरक के भागी बनते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥