वेदै: पुराणै: सिद्धांतै:
भिन्नै: विभ्रांत-चेतस:
श्र्चय म नाधिगच्छंति
किं तत्त्वं किं परं पदं
"वेदों, पुराणों और अन्य शास्त्रों के निष्कर्षों से भ्रमित व्यक्ति सर्वोच्च भगवान और उनके सर्वोच्च निवास वैकुण्ठ के संबंध में सत्य को पूरी तरह से नहीं जान सकते।"
