श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 172
 
 
श्लोक  2.6.172 
চণ্ডালাদি নাচযে প্রভুর গুণ-গানে
ভট্ট-মিশ্র-চক্রবর্তী সবে নিন্দা জানে
चण्डालादि नाचये प्रभुर गुण-गाने
भट्ट-मिश्र-चक्रवर्ती सबे निन्दा जाने
 
 
अनुवाद
यहाँ तक कि कुत्ते खाने वाले भी भगवान की महिमा का गान करते हुए नाच रहे हैं, जबकि भट्ट, मिश्र और चक्रवर्ती आलोचना में लगे हुए हैं।
 
Even the dog eaters are dancing and singing the praises of God, while Bhatt, Mishra and Chakravarti are engaged in criticism.
तात्पर्य
कंडल नृत्य करते गाते हैं श्री चैतन्यदेव का जस, मूढ़ अधम वर्ग के लोग हैं। परन्तु भट्ट, मिश्र, चक्रवर्ती जैसे पंडित श्रेष्ठ वर्ग के लोग भगवान् की निंदा को अपना स्वधर्म बनाये बैठे हैं। पद्म पुराण, उत्तर खंड अध्याय पचास में कहा गया है:-

वेदाध्याय रता नित्यं नित्यं वै यज्ञयाजकाः

अग्निहोत्र रता नित्यं विष्णुधर्मपरां मुखः

निंदन्ति विष्णु भक्तांश्च वेद बाह्यः सुरेश्वरी

“हे सुरेश्वरी! जो लोग नित्य वेदों का अध्ययन और यज्ञयाग करके भी भगवान की भक्ति की नित्य लीलाओं से विमुख रहते हैं, साथ ही जो वेद विहित कर्मों में अनास्था रखते हैं, वे सदैव भगवान और उनके भक्तों की ही निंदा करते हैं।”

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)