श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 167
 
 
श्लोक  2.6.167 
অদ্বৈত বলযে,—“যদি ভক্তি বিলাইব
বাস্ত্রী-শূদ্র-আদি যত মূর্খেরে সে দিবা
अद्वैत बलये,—“यदि भक्ति बिलाइब
बास्त्री-शूद्र-आदि यत मूर्खेरे से दिबा
 
 
अनुवाद
अद्वैत ने उत्तर दिया, "यदि आप भक्ति सेवा वितरित करेंगे, तो इसे अल्पबुद्धि व्यक्तियों को भी दीजिए, जिनमें स्त्रियाँ और शूद्र भी शामिल हैं।
 
Advaita replied, “If you distribute devotional service, give it also to persons of low intelligence, including women and Shudras.
तात्पर्य
अद्वैत ने कहा, "यदि तुम भगवान की भक्ति-भक्ति, जो महान व्यक्तित्वों जैसे ब्रह्मा के लिए भी दुर्लभ है, इस दुनिया में सभी को वितरित करोगे, तो तुम्हें उस प्रेममयी भक्ति सेवा को उन लोगों को वितरित करना होगा जो अयोग्य माने जाते हैं। अब तक, सामान्य लोग मानते हैं कि स्त्रियाँ, शूद्र और मूर्ख भगवान की सेवा के लिए अयोग्य हैं। क्या तुम उन अयोग्य लोगों को भगवान हरि की भक्ति-भक्ति देकर उस अवधारणा को बदल सकते हो।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)