श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  2.6.158 
আপন গলার মালা অদ্বৈতেরে দিযা
’বর মাগ’, ’বর মাগ’—বলেন হাসিযা
आपन गलार माला अद्वैतेरे दिया
’वर माग’, ’वर माग’—बलेन हासिया
 
 
अनुवाद
भगवान ने अपनी माला अद्वैत को दे दी और फिर मुस्कुराकर कहा, "वरदान मांगो। वरदान मांगो।"
 
The Lord gave his garland to Advaita and then smilingly said, "Ask for a boon. Ask for a boon."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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