श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  2.6.157 
হৈল প্রভুর আজ্ঞা,—রহিবার তরে
তত-ক্ষণে রহিলেন,—আজ্ঞা করি’ শিরে
हैल प्रभुर आज्ञा,—रहिबार तरे
तत-क्षणे रहिलेन,—आज्ञा करि’ शिरे
 
 
अनुवाद
जब भगवान ने अद्वैत को नृत्य बंद करने का आदेश दिया, तो भगवान के आदेश का सम्मान करते हुए उसने तुरंत नृत्य बंद कर दिया।
 
When the Lord ordered Advaita to stop dancing, he immediately stopped dancing, respecting the Lord's order.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)