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श्लोक 2.6.154  |
এ দু’যের প্রীতি যেন অনন্ত-শঙ্কর
দুই কৃষ্ণ-চৈতন্যের প্রিয-কলেবর |
ए दु’येर प्रीति येन अनन्त-शङ्कर
दुइ कृष्ण-चैतन्येर प्रिय-कलेवर |
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| अनुवाद |
| इन दोनों के बीच प्रेम का आदान-प्रदान अनंत और शंकर के बीच प्रेम के आदान-प्रदान जैसा है, क्योंकि वे दोनों ही श्रीकृष्ण चैतन्य के प्रिय रूप हैं। |
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| The exchange of love between these two is like the exchange of love between Ananta and Shankara, because both of them are the beloved forms of Sri Krishna Chaitanya. |
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