श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  2.6.152 
নিত্যানন্দ-অদ্বৈতে অভেদ করি’ জান
এই অবতারে জানে যত ভাগ্যবান্
नित्यानन्द-अद्वैते अभेद करि’ जान
एइ अवतारे जाने यत भाग्यवान्
 
 
अनुवाद
सभी भाग्यशाली आत्माएं यह भलीभांति जानती हैं कि नित्यानन्द और अद्वैत में कोई अंतर नहीं है।
 
All fortunate souls know very well that there is no difference between Nityananda and Advaita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)