श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  2.6.150 
পূর্বে বলিযাছি নিত্যানন্দ নানা-রূপে
চৈতন্যের সেবা করে অশেষ কৌতুকে
पूर्वे बलियाछि नित्यानन्द नाना-रूपे
चैतन्येर सेवा करे अशेष कौतुके
 
 
अनुवाद
मैं पहले ही बता चुका हूँ कि किस प्रकार नित्यानंद विभिन्न रूपों में भगवान चैतन्य की प्रसन्नतापूर्वक सेवा करते हैं।
 
I have already explained how Nityananda happily serves Lord Caitanya in various forms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)