श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  2.6.149 
অদ্বৈত-চরিত্রে হাসে নিত্যানন্দ-রায
এক মূর্তি, দুই ভাগ—কৃষ্ণের লীলায
अद्वैत-चरित्रे हासे नित्यानन्द-राय
एक मूर्ति, दुइ भाग—कृष्णेर लीलाय
 
 
अनुवाद
नित्यानंद राय अद्वैत के व्यवहार पर मुस्कुराए। वे वास्तव में एक हैं, लेकिन कृष्ण की लीलाओं के कारण वे दो हो गए।
 
Nityananda Rai smiled at Advaita's behavior. They are actually one, but because of Krishna's pastimes they became two.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)