vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन
»
श्लोक 149
श्लोक
2.6.149
অদ্বৈত-চরিত্রে হাসে নিত্যানন্দ-রায
এক মূর্তি, দুই ভাগ—কৃষ্ণের লীলায
अद्वैत-चरित्रे हासे नित्यानन्द-राय
एक मूर्ति, दुइ भाग—कृष्णेर लीलाय
अनुवाद
नित्यानंद राय अद्वैत के व्यवहार पर मुस्कुराए। वे वास्तव में एक हैं, लेकिन कृष्ण की लीलाओं के कारण वे दो हो गए।
Nityananda Rai smiled at Advaita's behavior. They are actually one, but because of Krishna's pastimes they became two.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×