श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  2.6.148 
যাইবে কোথায আজি রাখিমু বান্ধিযা”
ক্ষণে বলে প্রভু, ক্ষণে বলে মাতালিযা
याइबे कोथाय आजि राखिमु बान्धिया”
क्षणे बले प्रभु, क्षणे बले मातालिया
 
 
अनुवाद
“आज मैं तुम्हें बाँध दूँगा, फिर तुम कहाँ जाओगे?” कभी अद्वैत नित्यानंद को प्रभु कहकर संबोधित करते थे, तो कभी उन्हें शराबी कहते थे।
 
“Today I will tie you up, then where will you go?” Sometimes Advaita addressed Nityananda as Prabhu, and sometimes he called him a drunkard.
तात्पर्य
शब्द मातालिया का अर्थ है "पागलपन" या "मत्त"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)