श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  2.6.147 
হাসি’ বলে,—“ভাল হৈল আইলা নিতাই
এত-দিন তোমার নাগালি নাহি পাই
हासि’ बले,—“भाल हैल आइला निताइ
एत-दिन तोमार नागालि नाहि पाइ
 
 
अनुवाद
वह मुस्कुराया और बोला, "हे निताई, अच्छा हुआ कि तुम आ गए। बहुत दिनों से मैं तुम्हें देख नहीं पाया था।"
 
He smiled and said, "Oh Nitai, it's good that you have come. I haven't seen you for a long time."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)