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श्लोक 2.6.144  |
যে কীর্তন যখন শুনযে’ সেই হয
এক ভাবে স্থির নহে, আনন্দে নাচয |
ये कीर्तन यखन शुनये’ सेइ हय
एक भावे स्थिर नहे, आनन्दे नाचय |
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| अनुवाद |
| कीर्तन के भाव के अनुसार वे विभिन्न प्रकार से प्रसन्नतापूर्वक नृत्य करते थे। |
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| They would dance happily in different ways according to the mood of the kirtan. |
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