श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  2.6.142 
ক্ষণে বা বিশাল নাচে, ক্ষণে বা মধুর
ক্ষণে বা দশনে তৃণ ধরযে প্রচুর
क्षणे वा विशाल नाचे, क्षणे वा मधुर
क्षणे वा दशने तृण धरये प्रचुर
 
 
अनुवाद
एक क्षण वे उन्मत्त होकर नाचते, तो दूसरे क्षण मधुरता से नाचते। एक क्षण वे अपने दांतों के बीच कई तिनके पकड़े हुए।
 
One moment they danced wildly, the next softly, one moment holding several straws between their teeth.
तात्पर्य
विश्वाल शब्द का अर्थ होता है "बिना रोक-टोक" या "फैला हुआ।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)