श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  2.6.138 
সস্ত্রীকে অদ্বৈত হৈলা পূর্ণ-মনোরথ
পাইযা চরণ শিরে পূর্ব-অভিমত
सस्त्रीके अद्वैत हैला पूर्ण-मनोरथ
पाइया चरण शिरे पूर्व-अभिमत
 
 
अनुवाद
अद्वैत और उनकी पत्नी की हृदय की इच्छा पूरी हो गई, क्योंकि उन्होंने भगवान के चरणकमलों को प्राप्त कर लिया, जैसा कि उन्होंने पहले से ही चाहा था।
 
The heart's desire of Advaita and his wife was fulfilled, as they attained the lotus feet of the Lord, as they had already desired.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)