श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  2.6.137 
গডাগডি যায কেহ, মালসাট মারে
কারো গলা ধরি’ কেহ কান্দে উচ্চৈঃস্বরে
गडागडि याय केह, मालसाट मारे
कारो गला धरि’ केह कान्दे उच्चैःस्वरे
 
 
अनुवाद
कुछ लोग ज़मीन पर लोटने लगे, कुछ तालियाँ बजाने लगे, और कुछ एक-दूसरे को गले लगाकर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे।
 
Some people started rolling on the ground, some started clapping, and some hugged each other and started crying loudly.
तात्पर्य
मलसाटा शब्द का तात्पर्य पहलवान की पोशाक या कुश्ती मैच की शुरुआत से है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)