श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  2.6.134 
সর্ব-ভুত অন্তর্যামী শ্রী-গৌরাঙ্গ-রায
চরণ-তুলিযা দিলা অদ্বৈত-মাথায
सर्व-भुत अन्तर्यामी श्री-गौराङ्ग-राय
चरण-तुलिया दिला अद्वैत-माथाय
 
 
अनुवाद
समस्त जीवों के परमात्मा श्री गौरांग राय ने अद्वैत के मस्तक पर अपने चरणकमल रखे।
 
Sri Gauranga Rai, the Supreme God of all living beings, placed his lotus feet on the head of Advaita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)