श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  2.6.131 
এই সে চরণ হৈতে গঙ্গা-অবতার
শঙ্কর ধরিলাশিরে মহাবেগ যার
एइ से चरण हैते गङ्गा-अवतार
शङ्कर धरिलाशिरे महावेग यार
 
 
अनुवाद
भगवान शिव द्वारा धारण की जाने वाली गंगा का प्रबल प्रवाह इन्हीं चरण कमलों से निकलता है।
 
The powerful flow of Ganga, carried by Lord Shiva, originates from these very feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)