श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  2.6.129 
এই সে চরণ ব্রহ্মা পূজযে সদায
শ্রুতি-স্মৃতি-পুরাণে ইহার যশ গায
एइ से चरण ब्रह्मा पूजये सदाय
श्रुति-स्मृति-पुराणे इहार यश गाय
 
 
अनुवाद
भगवान ब्रह्मा सदैव इन चरणकमलों की पूजा करते हैं तथा श्रुतियाँ, स्मृतियाँ और पुराण इन चरणकमलों की महिमा का बखान करते हैं।
 
Lord Brahma always worships these lotus feet and the Shrutis, Smritis and Puranas praise the glory of these lotus feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)