श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  2.6.127 
এই তোর দুইখানি চরণ-কমল
ইহার সে রসে গৌরী-শঙ্কর বিহ্বল
एइ तोर दुइखानि चरण-कमल
इहार से रसे गौरी-शङ्कर विह्वल
 
 
अनुवाद
गौरी और शंकर आपके चरणकमलों के अमृत से अभिभूत हैं।
 
Gauri and Shankar are overwhelmed by the nectar of your lotus feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)