श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  2.6.125 
লুকাইতে বড প্রভু তুমি মহাবীর
ভক্ত-জনে তোমা ধরি’ করযে বাহির
लुकाइते बड प्रभु तुमि महावीर
भक्त-जने तोमा धरि’ करये बाहिर
 
 
अनुवाद
आप स्वयं को छिपाने में अत्यन्त कुशल हैं, किन्तु आपके भक्त आपको पहचान लेते हैं और उजागर कर देते हैं।
 
You are very skilled in hiding yourself, but your devotees recognize you and expose you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)